बदरीनाथ धाम दान प्रकरण पर सीएम धामी सख्त, कहा- आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी सरकार
CM Dhami takes a tough stance on the Badrinath Dham donation issue
देहरादून। CM Dhami takes a tough stance on the Badrinath Dham donation issue; मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नजरें तिरछी होते ही बदरीनाथ धाम के दान-चढ़ावा हेराफेरी प्रकरण में जांच और कार्रवाई की गति कई गुना तेज हो गई है।
कई दिनों से चर्चा-परिचर्चा में चल रहे बदरीनाथ प्रकरण में सीएम के दखल से न सिर्फ शासन की उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित हुई, बल्कि बीकेटीसी के पीए को भी निलंबित कर दिया गया। पुलिस और प्रशासनिक अफसर यहीं तक नहीं रुके, अगली ही सुबह पीए के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कर ली गई।
आस्था पर प्रहार
मुख्यमंत्री धामी ने अपने सख्त तेवरों से पुलिस, प्रशासनिक अफसरों व धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में लगे तंत्र को यह स्पष्ट संदेश दिया कि इस मामले को केवल वित्तीय अनियमितता के दायरे में नहीं रखा जा सकता है। यह आस्था पर प्रहार है।
चढ़ावा-दान चोरी का मामला कितना घृणित है और इस प्रकरण को लेकर सीएम खुद कितने गंभीर हैं, हरिद्वार में अपने बयान से उन्होंने इसका अहसास कराया। उन्होंने चढ़ावा चोरी को गोहत्या और माता-पिता की हत्या जैसा जघन्य अपराध बताया।
पिछले 36 घंटे में सीएम के निर्देश पर हुई कड़ी कार्रवाई और उसके बाद इस बयान से धामी ने एक बड़ा संदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि धार्मिक संस्थानों में किसी भी अनियमितता को सरकार सामान्य भ्रष्टाचार की तरह नहीं देखेगी। इस पूरे घटनाक्रम में अपने तेवर दिखाकर धामी ने यह सुस्पष्ट करने का प्रयास किया है कि आस्था पर प्रहार होगा तो सरकार चुप नहीं बैठेगी।
जीरो टालरेंस का दायरा बढ़ा
बदरीनाथ चढ़ावा प्रकरण में सरकार की त्वरित कार्रवाई को मुख्यमंत्री धामी की जीरो टालरेंस नीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। अब तक सरकार भर्ती घोटालों, नकल माफिया, भ्रष्टाचार और भू-माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश देती रही है। पहली बार किसी प्रमुख धार्मिक संस्थान में कथित वित्तीय अनियमितता पर भी उसी सख्ती का प्रदर्शन किया गया है। राजनीतिक तौर पर इसका संदेश यह है कि सरकार देवस्थानों के मामलों को लेकर गंभीर है।
प्रशासनिक दृढ़ता का उदाहरण बनेगी जांच
मुख्यमंत्री के सख्त संदेश के बाद अब जांच में कई परतें खुलेंगी। सरकार इसे अपनी प्रशासनिक दृढ़ता का उदाहरण बना सकती है। यही वजह है कि बदरीनाथ चढ़ावा प्रकरण अब केवल सरकार के राजनीतिक संकल्प की भी परीक्षा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा ही इस पूरे घटनाक्रम का असर तय करेगी।